श्रीकृष्ण को बांसुरी अत्यंत ही प्रिय हैं। उन्हें कृष्‍ण जन्माष्टमी पर बांसुरी भेंट करने से वे प्रसन्न होते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार बांसुरी घर में रखने के कई लाभ मिलते हैं, लेकिन बांसुरी कैसी होना चाहिए और किस दिशा में रखना चाहिए इसका ज्ञान भी होना जरूरी है अन्यथा नुकसान हो सकता है।

बांसुरी कैसी होना चाहिए?
अधिकतर बांसुरी बांस से बनी होती है क्योंकि बांस के पौधे को दिव्य माना जाता है। हालांकि लकड़ी की बांसुरी होती है तो श्रीकृष्ण की कृपा आपके ऊपर सदैव बनी रहेगी। नया व्यापार शुरू करना है तो अलमारी में लकड़ी की बांसुरी रखनी चाहिए। जीवन में सुख, शांति और खुशियों के लिए चंदन की लकड़ी की बांसुरी रखें। शिक्षा, व्यवसाय या नौकरी में बांधाएं उत्पन्न हो रही है, तो घर के पूर्व या उत्तर दिशा में सोने या पीतल की बांसुरी रखें। दुकान या व्यापारिक संस्थान में चांदी की बांसुरी रखने से व्यापार में वृद्धि और धन लाभ होता है। पूजा खर में रखने से आर्थिक समस्या से छुटकारा मिलता है। गंभीर या लंबी बीमारियों से बचने के लिए कितन में स्वर्ण यानी गोल्ड की बांसुरी रखना चाहिए।
बांसुरी का रंग कैसा होना चाहिए?
मनपसंद नौकरी पाने के लिए रूम के मुख्‍य द्वार के पास पीली बांसुरी रखें। अटके कार्य पूर्ण करने के लिए घर के मंदिर में मोर पंख लगी बांसुरी रखें। मनचाहे साथी से विवाह के लिए तकिये के नीचे लाल बांसुरी रखें। संतान प्राप्ति हेतु बेडरूम में हरी बांसुरी रखें, जो किसी को दिखाई न दें। करियर में सफलता के लिए स्टडी रूप में सफेद बांसुरी रखें। गृहकलह खत्म करने के लिए एक ही रंग की दो बांसुरियां मुख्य हॉल में रखें। नेगेटिविटी से बचने के लिए काले रंग से सजी बांसुरी घर या दुकान की छत पर टांग दें।

किस दिशा में रखें बांसुरी?
1. बांसुरी को पूजाघर में भी रखा जा सकता है। पूजा घर ईशान कोण में होना चाहिए।
2. बांसुरी को कमरे के दरवाजे के ऊपर या सिरहाने रखने से परिवार के सदस्य हमेशा स्वस्थ रहते हैं।

3. आर्थिक उन्नति को बढ़ाने के लिए पूजाघर के दरवाजे पर बांसुरी रखना चाहिए।

4. ऑफिस या दुकान में उत्तर दिशा में, मुख्य द्वार के उपर या छत पर बांसुरी टांगने से लाभ मिलता है।

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